फरवरी 2021 का एंटीलिया बमकांड आज भी कई गंभीर और अनुत्तरित सवालों से घिरा हुआ है। एंटीलिया के पास जिलेटिन की छड़ियों और धमकी भरे पत्र के साथ स्कॉर्पियो मिलने के बाद घटनाक्रम ने गंभीर रूप लिया और इसके बाद व्यवसायी मनसुख हिरेन की संदिग्ध मौत ने मामले को और पेचीदा बना दिया। जांच के दौरान तत्कालीन पुलिस अधिकारी सचिन वाझे सहित कई पुलिसकर्मियों की भूमिका जांच के दायरे में आई और NIA ने मामले में एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया।
लेकिन वर्षों की जांच के बाद भी मूल सवाल बना हुआ है—क्या इस पूरे घटनाक्रम की सभी महत्वपूर्ण कड़ियों और इसके पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ चुकी है?
यह लेख केवल कुछ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि पुलिस जवाबदेही, जांच की पारदर्शिता और संस्थागत जिम्मेदारी जैसे व्यापक मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करता है। विशेष रूप से यह सवाल उठाया गया है कि मुंबई पुलिस, ATS मुंबई और NIA की भूमिका तथा उनके द्वारा की गई जांच की भी उसी स्तर पर स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा हुई है या नहीं।
एंटीलिया मामला केवल फरवरी–मार्च 2021 में हुई घटनाओं तक सीमित नहीं है। यह हमारी जांच एजेंसियों की पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के सामने पूरी सच्चाई रखने की क्षमता की भी परीक्षा है।



