
१४ अगस्त की तारीख़ अपने आप में एक अजीब-सा ऐतिहासिक संयोग और गज़ब का धर्मसंकट लेकर आती है!
एक तरफ़ हमारे आदरणीय पुलिस आयुक्त (CP) देवेन भारती साहब का शुभ प्रकट दिवस, १४ अगस्त १९६८! दिल तो यही चाहता है कि ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ भव्य जश्न मनाया जाए, पूरे शहर में मिठाइयाँ बाँटी जाएँ और कमिश्नरेट को ऐसी शानदार रोशनाई से सजाया जाए कि दुनिया देखती रह जाए!
लेकिन… तभी इतिहास धीरे से कान में फुसफुसाता है…
“साहब, १४ अगस्त १९४७ को पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का भी जन्म हुआ था!”
बस, यहीं से असली दुविधा शुरू हो जाती है। डर यह कि हम यहाँ CP साहब के जन्मदिन की शहनाई बजाएँ और देशभक्ति के कोई स्वघोषित ठेकेदार इसे ही राष्ट्रभक्ति की कसौटी पर तौलने लगें, या कहीं इसे ‘राष्ट्रद्रोह’ तक न पहुँचा दें!
अब भला ऐसे ऐतिहासिक संयोग में इंसान करे तो क्या करे?
भारती साहब, सच कहें तो आपकी ‘एंट्री’ की टाइमिंग में ही थोड़ी-सी गड़बड़ी हो गई!
अगली बार अवतरण लेते समय इस ऐतिहासिक तारीख़ का ज़रा संज्ञान अवश्य ले लीजिएगा! वरना आपके स्वागत और सेलिब्रेशन में कोई कसर छोड़ने वाले हम भी कहाँ थे!
ख़ैर, तारीख़ों की यह ऐतिहासिक भूल-भुलैया अपनी जगह है और हमारी मजबूरियाँ अपनी जगह। आप सभी से बस इतनी गुज़ारिश है कि हमारी भावनाओं को सही नीयत से परखिएगा। हाथ जोड़कर अग्रिम क्षमा-याचना सहित स्पष्ट कर दें…
हमारी शुभकामनाएँ १००% स्वदेशी, पूर्णतः संवैधानिक और दिल की गहराइयों से निकली हुई हैं!
अब जो होगा, सो देखा जाएगा…
“देवेन भारती साहब, आपको प्रकट दिवस की अनंत हार्दिक शुभकामनाएँ!”
विशेष प्रार्थना : (दुआ)
ईश्वर करे आपका जन्मदिवस अत्यंत मंगलमय हो। आप सदैव स्वस्थ, मस्त और जबरदस्त रहें। आपके महान विचारों और कार्यशैली को समाज में निरंतर प्रतिष्ठा मिलती रहे और आप इसी रोब-दाब के साथ आजीवन CP कंपाउंड में विराजमान रहें।
सत्ता में चाहे कोई भी दल आए, आप हमेशा की तरह सत्तारूढ़ दल के सबसे व सबके प्रिय, सबके भरोसेमंद और सदाबहार बने रहें।
और आपकी इसी कृपा-दृष्टि के साए में हमारी ये शुभकामनाएँ भी सुरक्षित रहें। यही हमारी छोटी-सी दुआ है!
“आमीन!”
एक बार फिर, प्रकट दिवस की अनंत हार्दिक शुभकामनाएँ, भारती साहब!



