
डोंगरी पुलिस थाना क्षेत्र में हज़रत अब्दुल रहमान बाबा के उर्स के अवसर पर मुंबई के पुलिस आयुक्त हज़रत देवेन भारती जी अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की टीम तथा पुलिस बैंड के साथ श्रद्धा एवं सम्मान व्यक्त करने पहुँचे। इस अवसर पर उन्होंने अपने अधिकारियों के साथ पूर्ण पुलिस गणवेश में संदल की थाल अपने सिर पर धारण कर उर्स की धार्मिक परंपरा में सहभागिता की तथा पुलिस विभाग की ओर से सम्मान एवं सद्भावना व्यक्त की। निश्चित रूप से यह धार्मिक भावनाओं के प्रति सम्मान का एक सराहनीय संदेश है।
लेकिन जब “सर्वधर्म समभाव” की भावना की बात की जाती है, तो समानता की कसौटी भी समान होनी चाहिए।
इसी भावना के मद्देनज़र परम आदरणीय श्रीयुत देवेन भारती जी से एक विनम्र अपेक्षा है कि सनातन परंपरा के पावन “श्रावण मास“ में किसी शिव मंदिर में भी पुलिस बैंड द्वारा औपचारिक मानवंदना की व्यवस्था की जाए। यदि उर्स की धार्मिक परंपरा में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ पूर्ण गणवेश में सहभागिता प्रशासनिक सद्भाव एवं सम्मान का प्रतीक मानी जा सकती है, तो उसी भावना और समान दृष्टिकोण के तहत वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कंधों पर कांवड़ धारण कर कांवड़ यात्रा में सहभागी होकर शिव मंदिर तक पहुँचें।
ऐसा कदम समाज में समान सम्मान, निष्पक्ष प्रशासन और सर्वधर्म समभाव के प्रति एक स्पष्ट एवं सकारात्मक संदेश दे सकता है।
आखिर सर्वधर्म समभाव केवल संवैधानिक आदर्श या भाषणों का विषय नहीं, बल्कि प्रशासनिक आचरण में दिखाई देने वाला मूल्य भी होना चाहिए।
एक अनसुलझा प्रश्न
क्या प्रशासन की सम्मान-नीति वास्तव में सभी आस्थाओं के लिए समान है, या परिस्थितियों के अनुसार उसका स्वरूप “चयनात्मक” हो जाता है?
जनता शायद इसी प्रश्न के उत्तर में निष्पक्षता, समानता और वास्तविक सर्वधर्म समभाव की झलक देखना चाहेगी।




Ekdum sahi baat kahi hai dharam ek nahi anek hai aur Maan samman sabhi dharmo ko diya jana chahiye usmein kabhi bhi koi farak nahi karna chahiye