Mumbai Traffic Police Data Breach: Serious Concerns Over Right to Privacy and Procedural Irregularities
मुंबई: वाहतूक पोलीस (Taffic Police ), मुंबई द्वारा व्यक्तिगत डेटा की चोरी और उसकी अवैध बिक्री के एक चौंकाने वाले मामले ने नागरिकों की सुरक्षा और निजता पर गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े कर दिए हैं। बीकेसी (BKC) पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले (धारा 704/25) के अनुसार, राजेश कोटवानी नामक व्यक्ति पर नागरिकों के डेटा का दुरुपयोग करने और अवैध वसूली के लिए उन्हें धमकाने का आरोप है।
मुख्य बिंदु और विसंगतियां:
- डेटा की अवैध बिक्री: जांच में यह तथ्य सामने आया है कि ट्रैफिक विभाग के कॉन्स्टेबल अमोल दत्तात्रय औघड़े (PC – 80059) ने वित्तीय लाभ के बदले कोटवानी को गोपनीय व्यक्तिगत डेटा उपलब्ध कराया। साक्ष्यों के बावजूद, औघड़े को मुख्य मामले में आरोपी बनाने के बजाय केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित रखा गया है।
- अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: DCP (Traffic) सुश्री दीपाली घाटे द्वारा कॉन्स्टेबल औघड़े को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(b) के तहत सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया गया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, DCP के पास कॉन्स्टेबल को बर्खास्त करने का वैधानिक अधिकार (Jurisdiction) नहीं है; यह शक्ति केवल पुलिस कमिश्नर के पास सुरक्षित है।
- प्रक्रियात्मक त्रुटि: अनुच्छेद 311(2)(b) का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में किया जाता है। बिना किसी ठोस लिखित कारण के नियमित विभागीय जांच को दरकिनार करना कानून की स्थापित प्रक्रिया का उल्लंघन है। आशंका जताई जा रही है कि यह प्रक्रियागत खामी भविष्य में आरोपी कॉन्स्टेबल को न्यायिक जांच में ‘कानूनी कवच’ प्रदान कर सकती है।
- निजता के मौलिक अधिकार पर प्रहार: यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त ‘निजता के अधिकार’ का सीधा उल्लंघन है। नागरिकों द्वारा सरकार पर भरोसे के साथ साझा किया गया डेटा अब अपराधियों के हाथ में है, जिसका उपयोग उगाही के लिए किया जा रहा है।




“ठग्ज ऑफ हिंदुस्तान नहीं नहीं मुंबई” अपना काम कर रहे हैं/ ट्रॅफिक डीसीपी को प्रशासकीय कामकाज का कुछ भी ज्ञान नहीं है/ “यदा यदा हि कर्मस्य ग्लानिर्भवति मुंबई” – प्रभु मुंबई आयुक्तालय को बचा लो !